Wednesday, June 5, 2013

कुछ अधूरा से लगे है

क्यूँ  शाम तुम्हारा इंतज़ार रहा करता है
तकते हैं घडी की तरफ कुछ बेकरार रहा करता है
रोज़ छिड़ती हैं बातें हर तरह की दुनिया जहाँ की
तुम्हारे संग बीता हर लम्हा शानदार रहा करता है

सोचा न था एक अजनबी से ऐसी उन्सियत होगी
सोचा न था की फिर से ऐसी चाहत होगी
तड़पते हैं तुमको दिन भर की हर बात बताने को
तुम्हारी राह का दिल तलबगार रहा करता है

कभी यूँ भी होता है की राहें सूनी सूनी से रह जाती है
कभी यूँ भी होता है की चाँद रात को चमकता नहीं
तुम जो होते हो मसरूफ दुनियावी भाग दौड़ में
रात कटती नहीं और ख्वाब नागवार रहा करता है


Sunday, May 26, 2013

प्यार.. एक बार फिर....!!


तू इन डूबी हुई आँखों को ख्वाब दिखाया न कर
जिनको सुला चुका कबका वो अरमान जगाया न कर

तुझको चाहना मेरी फितरत में है शुमार जाना
तू इस क़दर हर बार मुझे आजमाया न कर

जोश में जो करू इज़हार तो मुस्करा दे बस थोडा सा
आँखें झुका के ज़मीन पे टेडी लकीरें बनाया न कर

रात भर उजली चांदनी के मानिंद बादलों में फिर करता हूँ
पलकों पे सजे ख्वाबों को झिंझोड़ के उठाया न कर....