क्यूँ शाम तुम्हारा इंतज़ार रहा करता है
तकते हैं घडी की तरफ कुछ बेकरार रहा करता है
रोज़ छिड़ती हैं बातें हर तरह की दुनिया जहाँ की
तुम्हारे संग बीता हर लम्हा शानदार रहा करता है
सोचा न था एक अजनबी से ऐसी उन्सियत होगी
सोचा न था की फिर से ऐसी चाहत होगी
तड़पते हैं तुमको दिन भर की हर बात बताने को
तुम्हारी राह का दिल तलबगार रहा करता है
कभी यूँ भी होता है की राहें सूनी सूनी से रह जाती है
कभी यूँ भी होता है की चाँद रात को चमकता नहीं
तुम जो होते हो मसरूफ दुनियावी भाग दौड़ में
रात कटती नहीं और ख्वाब नागवार रहा करता है
तकते हैं घडी की तरफ कुछ बेकरार रहा करता है
रोज़ छिड़ती हैं बातें हर तरह की दुनिया जहाँ की
तुम्हारे संग बीता हर लम्हा शानदार रहा करता है
सोचा न था एक अजनबी से ऐसी उन्सियत होगी
सोचा न था की फिर से ऐसी चाहत होगी
तड़पते हैं तुमको दिन भर की हर बात बताने को
तुम्हारी राह का दिल तलबगार रहा करता है
कभी यूँ भी होता है की राहें सूनी सूनी से रह जाती है
कभी यूँ भी होता है की चाँद रात को चमकता नहीं
तुम जो होते हो मसरूफ दुनियावी भाग दौड़ में
रात कटती नहीं और ख्वाब नागवार रहा करता है