Sunday, May 26, 2013

प्यार.. एक बार फिर....!!


तू इन डूबी हुई आँखों को ख्वाब दिखाया न कर
जिनको सुला चुका कबका वो अरमान जगाया न कर

तुझको चाहना मेरी फितरत में है शुमार जाना
तू इस क़दर हर बार मुझे आजमाया न कर

जोश में जो करू इज़हार तो मुस्करा दे बस थोडा सा
आँखें झुका के ज़मीन पे टेडी लकीरें बनाया न कर

रात भर उजली चांदनी के मानिंद बादलों में फिर करता हूँ
पलकों पे सजे ख्वाबों को झिंझोड़ के उठाया न कर....