चलते चलते
जो तुम कहो तो
एक बात कहूँ मैँ ।।
तुम्हारी यादोँ के साथ
फ़लक का चाँद मुस्कुराता है
हिज्र की उदासी
सुर्ख़ फूलोँ से सजती है
मुड़ मुड़कर तन्हाइयाँ पुकारती है
क्या कभी
किसी शाम मैँ भी याद आता हूँ
मुकम्मल उतनी ही बेक़रार शिद्दत के साथ
हो सके तो कभी यूँ ही बेमतलब ही सही
याद कर लेना
कि ऐसा शिक्स्ता दिल चाहता है
दिल का क्या है
दिल तो बहुत कुछ चाहता है....
जो तुम कहो तो
एक बात कहूँ मैँ ।।
तुम्हारी यादोँ के साथ
फ़लक का चाँद मुस्कुराता है
हिज्र की उदासी
सुर्ख़ फूलोँ से सजती है
मुड़ मुड़कर तन्हाइयाँ पुकारती है
क्या कभी
किसी शाम मैँ भी याद आता हूँ
मुकम्मल उतनी ही बेक़रार शिद्दत के साथ
हो सके तो कभी यूँ ही बेमतलब ही सही
याद कर लेना
कि ऐसा शिक्स्ता दिल चाहता है
दिल का क्या है
दिल तो बहुत कुछ चाहता है....
No comments:
Post a Comment