Tuesday, December 6, 2011

Mohabbat yun nahin Achhi

कोई वादा नहीं हम में
बस आपस में बहुत सी बातें
वो कभी कभी ख्वाब में आना...
वो कभी कभी ख्वाबी मुलाकातें
न मिलने की ही कोशिश
मगर एक अनकही सी है ...
जो हम दोनों समझते हैं
अजब एक सर ख़ुशी सी है ...
जो हम दोनों समझते हैं
ये सारे दिन का हर मंज़र
तिलस्मी चांदनी रातें ...
सुनहरे धूप के मौसम
हल्की सुख की बरसातें ....
सभी एक जिद में रहते हैं
मुझे हरदम ये कहते हैं
मोहब्बत यूँ नहीं अच्छी .......
मोहब्बत यूँ नहीं अच्छी ..........

-शारिब     




  

1 comment:

  1. very well written..!!i wish very soon you have big lines of fan following..

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